ब्रह्मांड (Universe) अनगिनत रहस्यों से भरा हुआ है, लेकिन इनमें सबसे रहस्यमयी और रोमांचक खगोलीय पिंड ब्लैक होल (Black Hole) को माना जाता है। यह अंतरिक्ष का ऐसा क्षेत्र है, जहां गुरुत्वाकर्षण इतना शक्तिशाली होता है कि प्रकाश भी इससे बाहर नहीं निकल सकता। इसी कारण ब्लैक होल को सीधे देख पाना संभव नहीं होता।
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हालांकि ब्लैक होल दिखाई नहीं देता, लेकिन वैज्ञानिक इसके आसपास मौजूद तारों, गैस और प्रकाश पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करके इसकी मौजूदगी का पता लगाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में आधुनिक दूरबीनों और अंतरिक्ष अनुसंधानों ने ब्लैक होल से जुड़े कई रहस्यों से पर्दा उठाया है।
इस लेख में हम आसान भाषा में जानेंगे कि ब्लैक होल क्या है, यह कैसे बनता है, इसके मुख्य भाग कौन-से हैं, इसके कितने प्रकार होते हैं और इससे जुड़े रोचक वैज्ञानिक तथ्य क्या हैं।
क्या सच में ब्लैक होल अपने पास आने वाली हर चीज़ को निगल जाता है? क्या कोई इंसान कभी ब्लैक होल के अंदर जा सकता है? इन सवालों ने दशकों से वैज्ञानिकों और आम लोगों दोनों को आकर्षित किया है।
Frequently Asked Questions
ब्लैक होल अंतरिक्ष का ऐसा क्षेत्र है, जहां गुरुत्वाकर्षण इतना अधिक होता है कि प्रकाश भी उससे बाहर नहीं निकल सकता। इसी कारण इसे सीधे देख पाना संभव नहीं होता।
जब सूर्य से कई गुना बड़े तारे का ईंधन समाप्त हो जाता है, तो वह सुपरनोवा विस्फोट के बाद अपने ही गुरुत्वाकर्षण के कारण सिकुड़कर ब्लैक होल का रूप ले सकता है।
वर्तमान वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार, पृथ्वी के पास ऐसा कोई ब्लैक होल नहीं है जो हमारे ग्रह के लिए खतरा बन सके। इसलिए निकट भविष्य में ऐसी संभावना नहीं है।
ब्लैक होल की पहली तस्वीर वर्ष 2019 में इवेंट होराइजन टेलीस्कोप (EHT) परियोजना द्वारा जारी की गई थी। यह तस्वीर M87 आकाशगंगा के केंद्र में स्थित सुपरमैसिव ब्लैक होल की थी।
ब्लैक होल स्वयं दिखाई नहीं देता, क्योंकि वह प्रकाश उत्सर्जित नहीं करता। वैज्ञानिक इसके आसपास मौजूद गैस, धूल, एक्स-रे विकिरण और तारों की गति का अध्ययन करके इसकी पहचान करते हैं।
मुख्य रूप से ब्लैक होल चार प्रकार के माने जाते हैं—स्टेलर ब्लैक होल, इंटरमीडिएट ब्लैक होल, सुपरमैसिव ब्लैक होल और प्राइमॉर्डियल ब्लैक होल।
आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत के अनुसार, ब्लैक होल के अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण के कारण समय की गति धीमी हो सकती है। हालांकि ब्लैक होल के अंदर वास्तव में क्या होता है, यह अभी भी वैज्ञानिक शोध का विषय है।


