क्या आपने कभी सोचा है कि एक ज्वालामुखी कुछ ही मिनटों में पूरे शहर को राख के ढेर में बदल सकता है? इतिहास में कई ऐसे ज्वालामुखी विस्फोट हुए हैं जिन्होंने हजारों लोगों की जान ले ली और विशाल क्षेत्रों को पूरी तरह तबाह कर दिया। यही कारण है कि ज्वालामुखी को प्रकृति की सबसे शक्तिशाली और विनाशकारी प्राकृतिक घटनाओं में से एक माना जाता है।
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पृथ्वी के भीतर अत्यधिक तापमान पर मौजूद पिघली हुई चट्टानों (मैग्मा), गैसों और खनिजों का दबाव जब बहुत अधिक बढ़ जाता है, तब वे पृथ्वी की सतह को तोड़कर बाहर निकलते हैं। इस प्रक्रिया को ज्वालामुखी विस्फोट (Volcanic Eruption) कहा जाता है। विस्फोट के दौरान लावा, राख, धुआँ, जहरीली गैसें और गर्म पत्थर कई किलोमीटर दूर तक फैल सकते हैं, जिससे आसपास के क्षेत्रों में भारी जान-माल का नुकसान होता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार दुनिया में लगभग 1,350 सक्रिय ज्वालामुखी हैं। इनमें से कई आज भी समय-समय पर विस्फोट करते रहते हैं। वहीं कुछ ज्वालामुखी वर्षों तक शांत रहने के बाद अचानक सक्रिय हो जाते हैं। विशेष रूप से Pacific Ring of Fire क्षेत्र दुनिया के अधिकांश सक्रिय ज्वालामुखियों का केंद्र माना जाता है।
इस लेख में हम दुनिया के 15 सबसे खतरनाक ज्वालामुखियों के बारे में विस्तार से जानेंगे। साथ ही यह भी समझेंगे कि ज्वालामुखी कैसे बनते हैं, इनके कितने प्रकार होते हैं, भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी कौन-सा है और इनसे जुड़े कई रोचक तथ्य।
ज्वालामुखी क्या होता है?
ज्वालामुखी (Volcano) पृथ्वी की सतह पर बना एक प्राकृतिक छिद्र, दरार या पर्वत होता है, जिसके माध्यम से पृथ्वी के भीतर मौजूद मैग्मा (Magma), गैसें, राख और अन्य ज्वालामुखीय पदार्थ बाहर निकलते हैं। जब यही मैग्मा पृथ्वी की सतह पर पहुँचता है, तो उसे लावा (Lava) कहा जाता है।
ज्वालामुखी पृथ्वी की भूगर्भीय गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनकी वजह से नए द्वीप बनते हैं, पहाड़ों का निर्माण होता है और पृथ्वी की सतह समय-समय पर बदलती रहती है। हालांकि, जब कोई सक्रिय ज्वालामुखी विस्फोट करता है, तो उसके प्रभाव कई किलोमीटर दूर तक महसूस किए जा सकते हैं।
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ज्वालामुखी कैसे बनता है?
पृथ्वी कई विशाल टेक्टोनिक प्लेटों (Tectonic Plates) से बनी हुई है। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, अलग होती हैं या एक-दूसरे के नीचे खिसकती हैं, तब पृथ्वी के अंदर मौजूद मैग्मा ऊपर की ओर बढ़ने लगता है। यदि दबाव बहुत अधिक बढ़ जाए, तो पृथ्वी की सतह फट जाती है और ज्वालामुखी विस्फोट होता है।
कुछ ज्वालामुखी हर कुछ वर्षों में सक्रिय होते हैं, जबकि कुछ सैकड़ों वर्षों तक शांत रहने के बाद अचानक फट सकते हैं। इसी कारण वैज्ञानिक आधुनिक तकनीकों की मदद से सक्रिय ज्वालामुखियों की लगातार निगरानी करते हैं।
ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान क्या निकलता है?
ज्वालामुखी से केवल लावा ही नहीं निकलता, बल्कि कई अन्य पदार्थ भी बाहर आते हैं।
- लावा (Lava)
- ज्वालामुखीय राख (Volcanic Ash)
- जलवाष्प (Water Vapour)
- सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें
- गर्म चट्टानें और पत्थरों के टुकड़े
इन पदार्थों का प्रभाव आसपास के वातावरण, जलवायु और मानव जीवन पर पड़ सकता है।
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Active, Dormant और Extinct Volcano में क्या अंतर है?
सभी ज्वालामुखी एक जैसे नहीं होते। उनकी गतिविधियों के आधार पर उन्हें तीन मुख्य श्रेणियों में बाँटा जाता है।
| प्रकार | अर्थ |
|---|---|
| Active Volcano (सक्रिय ज्वालामुखी) | जो वर्तमान में सक्रिय है या भविष्य में कभी भी विस्फोट कर सकता है। |
| Dormant Volcano (सुप्त ज्वालामुखी) | जो लंबे समय से शांत है, लेकिन भविष्य में दोबारा सक्रिय हो सकता है। |
| Extinct Volcano (विलुप्त ज्वालामुखी) | जिसके फिर से सक्रिय होने की संभावना लगभग समाप्त मानी जाती है। |
दुनिया में सबसे अधिक सक्रिय ज्वालामुखी कहाँ हैं?
दुनिया के अधिकांश सक्रिय ज्वालामुखी Pacific Ring of Fire में स्थित हैं। यह प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला एक विशाल भूगर्भीय क्षेत्र है, जहाँ पृथ्वी की कई टेक्टोनिक प्लेटें आपस में मिलती हैं। इंडोनेशिया, जापान, फिलीपींस, अमेरिका, चिली और न्यूज़ीलैंड जैसे देशों में बड़ी संख्या में सक्रिय ज्वालामुखी पाए जाते हैं।

भारत में सक्रिय ज्वालामुखी कहाँ है?
भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी बैरन द्वीप (Barren Island) है, जो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित है। यह समय-समय पर सक्रिय होता रहता है। इसके अलावा नारकोंडम (Narcondam) को सुप्त (Dormant) ज्वालामुखी माना जाता है।
दुनिया के 15 सबसे खतरनाक ज्वालामुखी
दुनिया में कई ऐसे ज्वालामुखी हैं जो अपने विनाशकारी इतिहास, लगातार होने वाली गतिविधियों और घनी आबादी के निकट स्थित होने के कारण सबसे खतरनाक माने जाते हैं। आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।
1. माउंट वेसुवियस (Mount Vesuvius) – इटली
- देश: इटली
- ऊँचाई: लगभग 1,281 मीटर
- स्थिति: सक्रिय (Active)
माउंट वेसुवियस दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और खतरनाक ज्वालामुखियों में से एक है। यह इटली के नेपल्स शहर के पास स्थित है। वर्ष 79 ईस्वी में इसके भीषण विस्फोट ने पोम्पेई और हरकुलेनियम जैसे प्राचीन शहरों को पूरी तरह राख और लावा के नीचे दफना दिया था। हजारों लोगों की मृत्यु हुई और पूरा क्षेत्र कई वर्षों तक रहने योग्य नहीं रहा।

आज भी इस ज्वालामुखी के आसपास लगभग 30 लाख से अधिक लोग रहते हैं। वैज्ञानिक लगातार इसकी गतिविधियों पर नजर रखते हैं क्योंकि भविष्य में होने वाला कोई भी बड़ा विस्फोट लाखों लोगों के लिए खतरा बन सकता है।
2. माउंट एटना (Mount Etna) – इटली
- देश: इटली
- ऊँचाई: लगभग 3,300 मीटर (समय के साथ बदलती रहती है)
- स्थिति: सक्रिय (Active)
माउंट एटना यूरोप का सबसे बड़ा और सबसे सक्रिय ज्वालामुखी है। यह इटली के सिसिली द्वीप पर स्थित है और हजारों वर्षों से लगातार सक्रिय है। यहां समय-समय पर छोटे और मध्यम स्तर के विस्फोट होते रहते हैं, जिनसे लावा आसपास के क्षेत्रों में फैल जाता है।
हालांकि एटना के अधिकांश विस्फोट नियंत्रित माने जाते हैं, लेकिन कई बार इसके कारण गांवों, खेतों और सड़कों को नुकसान पहुंचा है। इसके बावजूद इसकी उपजाऊ ज्वालामुखीय मिट्टी के कारण बड़ी संख्या में लोग इसके आसपास खेती करते हैं।
3. क्राकाटोआ (Krakatoa) – इंडोनेशिया
- देश: इंडोनेशिया
- स्थिति: सक्रिय (Active)
क्राकाटोआ का नाम इतिहास के सबसे विनाशकारी ज्वालामुखीय विस्फोटों में लिया जाता है। वर्ष 1883 में हुए इसके विस्फोट की आवाज लगभग 4,800 किलोमीटर दूर तक सुनी गई थी। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि इसके कारण समुद्र में विशाल सुनामी उत्पन्न हुई।
इस आपदा में 36,000 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई। वर्तमान में इसी क्षेत्र में अनाक क्राकाटोआ (Anak Krakatau) नामक नया ज्वालामुखी लगातार सक्रिय बना हुआ है और वैज्ञानिक इसकी नियमित निगरानी करते हैं।
4. मेरापी (Mount Merapi) – इंडोनेशिया
- देश: इंडोनेशिया
- ऊँचाई: लगभग 2,930 मीटर
- स्थिति: सक्रिय (Active)
माउंट मेरापी दुनिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है। यह इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर स्थित है और हर कुछ वर्षों में विस्फोट करता रहता है। इसके विस्फोटों से निकलने वाली गर्म गैसें, राख और पत्थर आसपास के गांवों के लिए बड़ा खतरा बन जाते हैं।

मेरापी के आसपास लाखों लोग रहते हैं, इसलिए सरकार ने यहां आधुनिक चेतावनी प्रणाली स्थापित की है ताकि किसी भी आपदा से पहले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
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5. माउंट सेंट हेलेंस (Mount St. Helens) – अमेरिका
- देश: अमेरिका
- स्थिति: सक्रिय (Active)
अमेरिका के वॉशिंगटन राज्य में स्थित माउंट सेंट हेलेंस वर्ष 1980 के विनाशकारी विस्फोट के कारण पूरी दुनिया में चर्चित हुआ। इस विस्फोट में पर्वत का ऊपरी हिस्सा उड़ गया, लाखों पेड़ नष्ट हो गए और आसपास का पूरा क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ।
यह घटना आधुनिक इतिहास की सबसे अधिक अध्ययन की जाने वाली ज्वालामुखीय घटनाओं में से एक मानी जाती है। आज भी वैज्ञानिक इसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखते हैं।
6. माउंट पिनातुबो (Mount Pinatubo) – फिलीपींस
- देश: फिलीपींस
- स्थिति: सक्रिय (Active)
माउंट पिनातुबो का वर्ष 1991 का विस्फोट 20वीं शताब्दी के सबसे शक्तिशाली ज्वालामुखीय विस्फोटों में गिना जाता है। इस विस्फोट से वातावरण में इतनी अधिक राख और सल्फर डाइऑक्साइड पहुँची कि कुछ समय के लिए पृथ्वी के औसत तापमान में कमी दर्ज की गई।
इस घटना ने यह भी दिखाया कि एक बड़ा ज्वालामुखी केवल स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक जलवायु को भी प्रभावित कर सकता है।
7. येलोस्टोन सुपरवोल्केनो (Yellowstone Supervolcano) – अमेरिका
- देश: अमेरिका
- स्थान: येलोस्टोन नेशनल पार्क, वायोमिंग
- स्थिति: सक्रिय सुपरवोल्केनो (Active Supervolcano)
येलोस्टोन सुपरवोल्केनो सामान्य ज्वालामुखियों से कई गुना बड़ा और अधिक शक्तिशाली माना जाता है। इसे सुपरवोल्केनो इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके विस्फोट की क्षमता सामान्य ज्वालामुखियों की तुलना में कई गुना अधिक होती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि भविष्य में इसका विशाल विस्फोट हुआ, तो इसका प्रभाव केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की जलवायु, कृषि और वायु गुणवत्ता पर पड़ सकता है।
हालांकि वर्तमान में इसके जल्द विस्फोट होने के कोई संकेत नहीं हैं, फिर भी इसकी लगातार वैज्ञानिक निगरानी की जाती है। इसकी संभावित शक्ति के कारण इसे दुनिया के सबसे खतरनाक ज्वालामुखियों में शामिल किया जाता है।
8. माउंट फूजी (Mount Fuji) – जापान
- देश: जापान
- ऊँचाई: 3,776 मीटर
- स्थिति: सक्रिय (Active)
माउंट फूजी जापान का सबसे ऊँचा पर्वत और राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है। अपनी खूबसूरत शंक्वाकार आकृति के कारण यह दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पर्वतों में गिना जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह एक सक्रिय ज्वालामुखी भी है।
इसका अंतिम बड़ा विस्फोट वर्ष 1707 में हुआ था, जिसे होएई विस्फोट (Hōei Eruption) के नाम से जाना जाता है। यदि भविष्य में यह दोबारा सक्रिय होता है, तो जापान की राजधानी टोक्यो सहित आसपास के घनी आबादी वाले क्षेत्रों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
9. माउंट न्यिरागोंगो (Mount Nyiragongo) – कांगो
- देश: लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो
- ऊँचाई: लगभग 3,470 मीटर
- स्थिति: सक्रिय (Active)
माउंट न्यिरागोंगो दुनिया के सबसे तेज़ बहने वाले लावा के लिए प्रसिद्ध है। इसका लावा अत्यधिक तरल होता है, जिसके कारण यह बहुत तेज़ गति से नीचे की ओर बहता है और आसपास के क्षेत्रों को कुछ ही समय में अपनी चपेट में ले सकता है।

वर्ष 2002 और 2021 में हुए इसके विस्फोटों ने गोमा शहर के हजारों लोगों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। इस ज्वालामुखी के शिखर पर स्थित विशाल लावा झील भी वैज्ञानिकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।
10. सकुराजिमा (Sakurajima) – जापान
- देश: जापान
- स्थिति: सक्रिय (Active)
सकुराजिमा जापान के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है। यह लगभग प्रतिदिन छोटी-बड़ी मात्रा में राख और धुआँ उत्सर्जित करता रहता है। इसके आसपास रहने वाले लोगों को अक्सर राख गिरने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
जापानी सरकार ने यहां उन्नत निगरानी प्रणाली और आपदा प्रबंधन व्यवस्था विकसित की है, ताकि किसी भी बड़े विस्फोट की स्थिति में लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
11. पोपोकेटेपेटल (Popocatépetl) – मेक्सिको
- देश: मेक्सिको
- ऊँचाई: लगभग 5,426 मीटर
- स्थिति: सक्रिय (Active)
पोपोकेटेपेटल मेक्सिको के सबसे प्रसिद्ध और सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है। यह मेक्सिको सिटी के अपेक्षाकृत निकट स्थित है, इसलिए इसके किसी भी बड़े विस्फोट का प्रभाव लाखों लोगों पर पड़ सकता है।
यह ज्वालामुखी समय-समय पर राख, धुआँ और गैसें छोड़ता रहता है। इसके कारण आसपास के क्षेत्रों में कई बार हवाई उड़ानों और दैनिक जीवन पर भी असर पड़ता है।
12. कोटोपैक्सी (Cotopaxi) – इक्वाडोर
- देश: इक्वाडोर
- ऊँचाई: लगभग 5,897 मीटर
- स्थिति: सक्रिय (Active)
कोटोपैक्सी दुनिया के सबसे ऊँचे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है। इसकी बर्फ से ढकी सुंदर चोटी इसे बेहद आकर्षक बनाती है, लेकिन यही बर्फ बड़े विस्फोट के समय पिघलकर विनाशकारी लहार (Lahar) यानी कीचड़ और मलबे की तेज़ धारा का रूप ले सकती है।
इसके कारण आसपास के कस्बों और गांवों को गंभीर खतरा बना रहता है, इसलिए इसकी नियमित निगरानी की जाती है।
13. ताल ज्वालामुखी (Taal Volcano) – फिलीपींस
- देश: फिलीपींस
- स्थिति: सक्रिय (Active)
ताल ज्वालामुखी आकार में छोटा होने के बावजूद दुनिया के सबसे खतरनाक ज्वालामुखियों में गिना जाता है। यह एक झील के बीच स्थित द्वीप पर बना हुआ है, जो इसे भूगोल की दृष्टि से बेहद अनोखा बनाता है।
वर्ष 2020 में इसके विस्फोट से भारी मात्रा में राख वातावरण में फैल गई थी, जिसके कारण हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इसकी अचानक सक्रिय होने की प्रवृत्ति इसे अत्यंत खतरनाक बनाती है।
14. किलाउआ (Kīlauea) – हवाई, अमेरिका
- देश: अमेरिका (हवाई)
- स्थिति: सक्रिय (Active)
किलाउआ दुनिया के सबसे अधिक सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है। यहां अक्सर लावा बहता रहता है और नए भूभाग का निर्माण होता रहता है।
हालांकि इसके अधिकांश विस्फोट धीमी गति से होते हैं, लेकिन कई बार लावा सड़कें, घर और अन्य संरचनाएं नष्ट कर देता है। वैज्ञानिकों के लिए यह ज्वालामुखी पृथ्वी की भूगर्भीय प्रक्रियाओं का अध्ययन करने का महत्वपूर्ण केंद्र है।
15. नेवादो डेल रुइज़ (Nevado del Ruiz) – कोलंबिया
- देश: कोलंबिया
- ऊँचाई: लगभग 5,321 मीटर
- स्थिति: सक्रिय (Active)
नेवादो डेल रुइज़ वर्ष 1985 की भीषण त्रासदी के कारण पूरी दुनिया में जाना जाता है। इसके विस्फोट से निकली गर्म राख और बर्फ के पिघलने से बनी विशाल लहार (कीचड़ और मलबे की धारा) ने आर्मेरो (Armero) शहर को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया था।
इस दुर्घटना में 23,000 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई, जिसे आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी ज्वालामुखीय आपदाओं में से एक माना जाता है। इस घटना के बाद दुनिया भर में ज्वालामुखी निगरानी और आपदा प्रबंधन पर अधिक ध्यान दिया जाने लगा।
दुनिया का सबसे खतरनाक ज्वालामुखी कौन-सा है?
यह सवाल अक्सर पूछा जाता है कि दुनिया का सबसे खतरनाक ज्वालामुखी कौन-सा है। इसका कोई एक निश्चित उत्तर नहीं है, क्योंकि किसी ज्वालामुखी का खतरा उसकी विस्फोट क्षमता, गतिविधि और उसके आसपास रहने वाली आबादी पर निर्भर करता है।
यदि संभावित विनाशकारी प्रभाव की बात करें, तो येलोस्टोन सुपरवोल्केनो को सबसे खतरनाक माना जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि भविष्य में इसका विशाल विस्फोट हुआ, तो इसका प्रभाव पूरी दुनिया की जलवायु, कृषि और हवाई यातायात पर पड़ सकता है।
वहीं, यदि वर्तमान में मानव आबादी के लिए खतरे की बात करें, तो माउंट वेसुवियस (इटली), माउंट मेरापी (इंडोनेशिया), सकुराजिमा (जापान) और पोपोकेटेपेटल (मेक्सिको) सबसे अधिक जोखिम वाले ज्वालामुखियों में शामिल हैं, क्योंकि इनके आसपास लाखों लोग रहते हैं।
क्या भारत में भी ज्वालामुखी हैं?
हाँ, भारत में भी ज्वालामुखी मौजूद हैं, लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है।
बैरन द्वीप (Barren Island)
बैरन द्वीप भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है। यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में बंगाल की खाड़ी के भीतर स्थित है। समय-समय पर यहां से लावा और धुआँ निकलता रहता है। यह क्षेत्र निर्जन है, इसलिए इसके विस्फोट से आम जनता पर सीधा प्रभाव बहुत कम पड़ता है।
नारकोंडम (Narcondam)
नारकोंडम द्वीप को एक सुप्त (Dormant) ज्वालामुखी माना जाता है। लंबे समय से यहां कोई विस्फोट दर्ज नहीं किया गया है, लेकिन भूवैज्ञानिक इसे पूरी तरह निष्क्रिय नहीं मानते।
ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
यदि किसी क्षेत्र में ज्वालामुखी विस्फोट की संभावना हो, तो सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां इस प्रकार हैं—
- स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की चेतावनियों का पालन करें।
- यदि निकासी (Evacuation) का आदेश मिले, तो तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएँ।
- राख से बचने के लिए मास्क, चश्मा और पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।
- ज्वालामुखी के आसपास के क्षेत्र में अनावश्यक यात्रा करने से बचें।
- खाने-पीने का पानी और आवश्यक दवाइयाँ पहले से सुरक्षित रखें।
- मोबाइल फोन, टॉर्च, बैटरी और प्राथमिक उपचार किट हमेशा तैयार रखें।
- राख गिरने के दौरान वाहन चलाने से बचें, क्योंकि इससे दृश्यता कम हो जाती है।
ज्वालामुखियों से जुड़े रोचक तथ्य
- दुनिया के लगभग 75% सक्रिय ज्वालामुखी Pacific Ring of Fire क्षेत्र में स्थित हैं।
- पृथ्वी पर ही नहीं, बल्कि मंगल ग्रह और बृहस्पति के उपग्रह आयो (Io) पर भी ज्वालामुखी पाए जाते हैं।
- समुद्र के भीतर भी हजारों ज्वालामुखी मौजूद हैं, जिनमें से कई आज भी सक्रिय हैं।
- ज्वालामुखी से निकलने वाली राख लंबे समय में मिट्टी को अत्यधिक उपजाऊ बना देती है, इसलिए कई किसान ज्वालामुखीय क्षेत्रों के आसपास खेती करते हैं।
- हवाई द्वीप (Hawaii) का निर्माण लाखों वर्षों तक लगातार हुए ज्वालामुखीय विस्फोटों के कारण हुआ है।
- कुछ ज्वालामुखियों के भीतर स्थायी लावा झील (Lava Lake) भी पाई जाती है, जो एक दुर्लभ प्राकृतिक घटना है।
- ज्वालामुखीय विस्फोट से निकलने वाली गैसें कभी-कभी वैश्विक तापमान को अस्थायी रूप से प्रभावित कर सकती हैं।
निष्कर्ष
ज्वालामुखी पृथ्वी की सबसे शक्तिशाली प्राकृतिक घटनाओं में से एक हैं। ये एक ओर नई भूमि और पर्वतों का निर्माण करते हैं, तो दूसरी ओर अपने विनाशकारी विस्फोटों से बड़े पैमाने पर तबाही भी मचा सकते हैं। इसलिए दुनिया भर के वैज्ञानिक सक्रिय ज्वालामुखियों की लगातार निगरानी करते हैं, ताकि समय रहते लोगों को चेतावनी देकर नुकसान को कम किया जा सके।
इस लेख में आपने दुनिया के 15 सबसे खतरनाक ज्वालामुखियों, उनके इतिहास, स्थान, विशेषताओं और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जाना। यदि आपको भूगोल, प्राकृतिक आपदाओं और दुनिया के रहस्यमय स्थानों के बारे में जानकारी प्राप्त करना पसंद है, तो ऐसे विषयों का अध्ययन आपको पृथ्वी की अद्भुत प्राकृतिक शक्तियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा।
Frequently Asked Questions
संभावित वैश्विक प्रभाव के आधार पर येलोस्टोन सुपरवोल्केनो को सबसे खतरनाक माना जाता है।
बैरन द्वीप (Barren Island) भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है।
दुनिया के अधिकांश सक्रिय ज्वालामुखी Pacific Ring of Fire क्षेत्र में स्थित हैं।
पृथ्वी के भीतर इसे मैग्मा (Magma) और सतह पर आने के बाद लावा (Lava) कहा जाता है।
नहीं। ज्वालामुखी सक्रिय (Active), सुप्त (Dormant) और विलुप्त (Extinct) तीन प्रकार के होते हैं।
लावा, राख, जहरीली गैसें, गर्म चट्टानें और कीचड़ की तेज़ धारा (लहार) सबसे बड़े खतरे होते हैं।
वैज्ञानिक भूकंपीय गतिविधियों, गैसों के उत्सर्जन और भूमि में होने वाले बदलावों का अध्ययन करके संभावित विस्फोट का अनुमान लगा सकते हैं, लेकिन सटीक समय बताना अभी भी कठिन है।
यदि ज्वालामुखी सक्रिय है, तो उसके आसपास रहना जोखिम भरा हो सकता है। हालांकि कई क्षेत्रों में आधुनिक निगरानी और चेतावनी प्रणालियों के कारण जोखिम को काफी हद तक कम किया जाता है।