क्रिकेट के किसी रोमांचक मैच में आपने कई बार कमेंटेटर को कहते सुना होगा, “टीम ने DRS लिया है” या “अंपायर का फैसला DRS के बाद बदल गया।” ऐसे में आपके मन में भी सवाल आया होगा कि क्रिकेट में DRS क्या है, DRS कैसे काम करता है और इसका इस्तेमाल कब किया जाता है?
Table of Contents
- DRS का फुल फॉर्म क्या है?
- क्रिकेट में DRS क्या है?
- DRS की शुरुआत कब हुई?
- DRS कब लिया जा सकता है?
- किन फैसलों में DRS नहीं लिया जा सकता?
- DRS लेने का तरीका
- एक टीम को कितने DRS मिलते हैं?
- Umpire’s Call क्या होता है?
- उदाहरण से समझिए DRS
- DRS के फायदे
- DRS की सीमाएं
- क्या IPL में DRS होता है?
- क्या DRS हमेशा सही फैसला देता है?
- निष्कर्ष
आज के आधुनिक क्रिकेट में DRS (Decision Review System) खेल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। यह तकनीक खिलाड़ियों को मैदान पर दिए गए अंपायर के फैसले की समीक्षा (Review) करने का अवसर देती है। Hawk-Eye, UltraEdge और अन्य आधुनिक तकनीकों की मदद से विवादित फैसलों की दोबारा जांच की जाती है, जिससे मैच अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनता है।
यदि आप DRS का फुल फॉर्म, इसके नियम, Umpire’s Call, DRS लेने का तरीका और इसके फायदे-नुकसान जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके सभी सवालों का आसान भाषा में जवाब देगा।
DRS का फुल फॉर्म क्या है?
DRS का फुल फॉर्म (Full Form) है – Decision Review System।
हिंदी में इसे निर्णय समीक्षा प्रणाली कहा जाता है।
यह एक ऐसी तकनीकी व्यवस्था है, जिसके माध्यम से बल्लेबाज या गेंदबाजी करने वाली टीम मैदान पर मौजूद अंपायर के फैसले को चुनौती दे सकती है। इसके बाद तीसरा अंपायर (Third Umpire) आधुनिक तकनीकों की सहायता से पूरे घटनाक्रम की समीक्षा करता है और अंतिम फैसला सुनाता है।
- DRS का फुल फॉर्म: Decision Review System
- शुरुआत: 2008
- मुख्य तकनीकें: Hawk-Eye, UltraEdge, Hot Spot
- उपयोग: टेस्ट, वनडे, टी20 और IPL
- उद्देश्य: सही और निष्पक्ष अंपायरिंग
क्रिकेट में DRS क्या है?
DRS (Decision Review System) क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाली एक उन्नत तकनीक है, जिसका उद्देश्य गलत अंपायरिंग फैसलों को कम करना है।
यदि किसी टीम को लगता है कि अंपायर का फैसला सही नहीं है, तो वह निर्धारित समय के भीतर DRS की मांग कर सकती है। समीक्षा के दौरान तीसरा अंपायर वीडियो रिप्ले, बॉल ट्रैकिंग और अन्य तकनीकों की मदद से फैसला जांचता है।
यदि मैदान पर दिया गया फैसला गलत साबित होता है, तो उसे बदल दिया जाता है। वहीं यदि फैसला सही होता है, तो मूल निर्णय बरकरार रहता है।
DRS की शुरुआत कब हुई?
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में DRS का पहला प्रयोग वर्ष 2008 में किया गया था।
शुरुआती दौर में कई क्रिकेट बोर्ड और खिलाड़ियों ने इस तकनीक पर सवाल उठाए थे, क्योंकि उस समय तकनीक इतनी विकसित नहीं थी। लेकिन समय के साथ इसमें लगातार सुधार हुआ और आज DRS टेस्ट, वनडे, टी20 और IPL जैसे बड़े टूर्नामेंटों का अहम हिस्सा बन चुका है।
DRS का संक्षिप्त इतिहास
| वर्ष | महत्वपूर्ण बदलाव |
|---|---|
| 2008 | पहली बार DRS का प्रयोग |
| 2009 | ICC ने सीमित रूप से लागू किया |
| 2016 | Umpire’s Call नियम को और स्पष्ट किया गया |
| वर्तमान | लगभग सभी बड़े अंतरराष्ट्रीय मैचों और IPL में उपयोग |
जब कोई खिलाड़ी DRS लेता है, तो तीसरा अंपायर कई आधुनिक तकनीकों की सहायता से पूरे घटनाक्रम की जांच करता है। इसके बाद उपलब्ध सभी साक्ष्यों के आधार पर अंतिम फैसला दिया जाता है।
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1. Hawk-Eye (Ball Tracking)
यह तकनीक गेंद की दिशा, गति और संभावित रास्ते का विश्लेषण करती है। खासतौर पर LBW के मामलों में यह बताती है कि गेंद स्टंप से टकराती या नहीं।
2. UltraEdge (Snickometer)
UltraEdge यह जांचने में मदद करती है कि गेंद बल्ले या ग्लव्स से लगी थी या नहीं। इसमें ध्वनि और वीडियो का संयुक्त विश्लेषण किया जाता है।
3. Hot Spot
Hot Spot इंफ्रारेड कैमरों की मदद से यह दिखाता है कि गेंद बल्ले, ग्लव्स या पैड से टकराई है या नहीं। हालांकि यह तकनीक हर मैच में उपलब्ध नहीं होती।
4. Slow Motion Replay
हाई-स्पीड कैमरों से रिकॉर्ड किए गए वीडियो को कई कोणों से देखा जाता है। इससे रन आउट, स्टंपिंग और कैच जैसे फैसलों की पुष्टि की जाती है।
DRS कब लिया जा सकता है?
DRS का उपयोग केवल कुछ विशेष प्रकार के फैसलों की समीक्षा के लिए किया जाता है।
इनमें शामिल हैं—
- LBW (Leg Before Wicket)
- कैच आउट
- बल्ले का किनारा लगा या नहीं
- कुछ स्टंपिंग और रन आउट की परिस्थितियां
- विकेट से जुड़े विवादित निर्णय
किन फैसलों में DRS नहीं लिया जा सकता?
हर निर्णय के लिए DRS उपलब्ध नहीं होता।
आमतौर पर निम्न स्थितियों में DRS का उपयोग नहीं किया जाता—
- Dead Ball
- कुछ Wide Ball के फैसले
- सामान्य फील्डिंग निर्णय
- वे फैसले जो Review के दायरे में नहीं आते
मैच के Playing Conditions के अनुसार इनमें बदलाव हो सकता है।
DRS लेने का तरीका
यदि बल्लेबाज या फील्डिंग टीम का कप्तान अंपायर के फैसले से सहमत नहीं होता, तो उसे निर्धारित समय (आमतौर पर 15 सेकंड) के भीतर DRS लेना होता है।
DRS लेने के लिए खिलाड़ी अपने दोनों हाथों से हवा में टीवी स्क्रीन जैसा आयताकार (Rectangle) संकेत बनाता है। इसके बाद तीसरा अंपायर समीक्षा शुरू करता है।
एक टीम को कितने DRS मिलते हैं?
यह मैच के प्रारूप पर निर्भर करता है।
| मैच का प्रकार | प्रति टीम उपलब्ध DRS |
| टेस्ट मैच | ICC नियमों के अनुसार निर्धारित संख्या |
| वनडे | 2 |
| टी20 | 2 |
यदि समीक्षा सफल रहती है और अंपायर का फैसला बदल जाता है, तो टीम का Review बचा रहता है। यदि फैसला सही पाया जाता है, तो टीम का एक Review कम हो जाता है।
Umpire’s Call क्या होता है?
DRS में सबसे अधिक चर्चा Umpire’s Call की होती है।
यदि Hawk-Eye के अनुसार गेंद स्टंप को बहुत कम अंतर से छू रही होती है और स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होती, तो मैदान पर मौजूद अंपायर का मूल फैसला बरकरार रखा जाता है। इसे ही Umpire’s Call कहा जाता है।
यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि तकनीक और मैदान पर मौजूद अंपायर—दोनों के निर्णयों के बीच संतुलन बना रहे।
उदाहरण से समझिए DRS
मान लीजिए अंपायर ने बल्लेबाज को LBW आउट दे दिया।
बल्लेबाज को लगता है कि गेंद पहले बल्ले से लगी थी, इसलिए वह DRS लेता है।
अब तीसरा अंपायर UltraEdge से जांच करता है। यदि UltraEdge में बल्ले से संपर्क दिखाई देता है, तो बल्लेबाज नॉट आउट घोषित कर दिया जाता है। वहीं यदि संपर्क नहीं मिलता और Hawk-Eye दिखाता है कि गेंद स्टंप पर लग रही थी, तो आउट का फैसला बरकरार रहता है।
DRS के फायदे
DRS ने क्रिकेट को पहले से अधिक निष्पक्ष बनाया है।
इसके प्रमुख लाभ हैं—
- गलत अंपायरिंग फैसलों में कमी आती है।
- खिलाड़ियों को निष्पक्ष निर्णय मिलता है।
- तकनीक की वजह से फैसले अधिक सटीक होते हैं।
- विवाद कम होते हैं।
- दर्शकों का खेल पर भरोसा बढ़ता है।
- बड़े टूर्नामेंटों में पारदर्शिता बनी रहती है।
DRS की सीमाएं
हालांकि DRS काफी उपयोगी तकनीक है, लेकिन इसकी कुछ सीमाएं भी हैं।
- सभी घरेलू प्रतियोगिताओं में उपलब्ध नहीं होता।
- आधुनिक उपकरण काफी महंगे होते हैं।
- Hawk-Eye भविष्यवाणी (Prediction) पर आधारित तकनीक है।
- Umpire’s Call को लेकर कई बार विवाद होता है।
- तकनीकी त्रुटि की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं होती।
क्या IPL में DRS होता है?
हाँ, IPL में DRS का नियमित रूप से उपयोग किया जाता है।
बल्लेबाजी और गेंदबाजी—दोनों टीमें DRS ले सकती हैं। हर सीजन में BCCI और ICC के लागू नियमों के अनुसार इसका संचालन किया जाता है।
क्या DRS हमेशा सही फैसला देता है?
DRS की सटीकता बहुत अधिक मानी जाती है, लेकिन यह 100% त्रुटिरहित नहीं है।
कुछ तकनीकें अनुमान (Prediction) पर आधारित होती हैं। यही कारण है कि ICC ने Umpire’s Call जैसे नियम बनाए हैं, ताकि अंतिम निर्णय में संतुलन बना रहे।
निष्कर्ष
DRS (Decision Review System) आधुनिक क्रिकेट की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक है। इसने अंपायरिंग को पहले की तुलना में अधिक सटीक, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया है। Hawk-Eye, UltraEdge, Hot Spot और Slow Motion Replay जैसी तकनीकों की मदद से विवादित फैसलों की दोबारा जांच की जाती है, जिससे खिलाड़ियों और दर्शकों—दोनों का खेल पर भरोसा बढ़ा है।
यदि आप क्रिकेट प्रेमी हैं, तो DRS की कार्यप्रणाली और नियमों को समझने से मैच देखने का अनुभव और भी रोमांचक हो जाएगा।
Frequently Asked Questions
DRS का फुल फॉर्म Decision Review System है। हिंदी में इसे निर्णय समीक्षा प्रणाली कहा जाता है। इसका उपयोग अंपायर के फैसलों की समीक्षा करने के लिए किया जाता है।
DRS एक तकनीकी समीक्षा प्रणाली है, जिसकी मदद से खिलाड़ी मैदान पर दिए गए अंपायर के फैसले को चुनौती देकर तीसरे अंपायर से दोबारा जांच करवा सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में DRS का पहली बार प्रयोग 2008 में किया गया था। बाद में ICC ने इसे टेस्ट, वनडे और टी20 क्रिकेट में चरणबद्ध तरीके से लागू किया।
DRS में मुख्य रूप से Hawk-Eye (Ball Tracking), UltraEdge (Snickometer), Hot Spot और Slow Motion Replay जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
DRS का उपयोग मुख्य रूप से LBW, कैच आउट, बल्ले का किनारा (Edge), स्टंपिंग और कुछ रन आउट से जुड़े विवादित फैसलों की समीक्षा के लिए किया जाता है।
जब Hawk-Eye के अनुसार गेंद स्टंप को बहुत कम अंतर से छू रही होती है और फैसला पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता, तब मैदान पर मौजूद अंपायर का मूल फैसला बरकरार रखा जाता है। इसे Umpire's Call कहा जाता है।
हाँ, IPL में DRS का उपयोग किया जाता है। बल्लेबाजी और गेंदबाजी करने वाली दोनों टीमें निर्धारित नियमों के अनुसार DRS ले सकती हैं।
DRS की सटीकता बहुत अधिक होती है, लेकिन यह पूरी तरह त्रुटिरहित नहीं है। कुछ निर्णय तकनीकी अनुमान (Prediction) पर आधारित होते हैं, इसलिए Umpire's Call जैसे नियम लागू किए जाते हैं।
DRS का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे गलत अंपायरिंग फैसलों में कमी आती है और खिलाड़ियों को अधिक निष्पक्ष तथा सटीक निर्णय मिलते हैं।
नहीं, DRS मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय मैचों, IPL और अन्य बड़े टूर्नामेंटों में उपलब्ध होता है। कई घरेलू प्रतियोगिताओं में लागत और तकनीकी संसाधनों की कमी के कारण इसका उपयोग नहीं किया जाता।