भारतीय संसद भारत गणराज्य का सर्वोच्च विधायी निकाय माना जाता है। यह हमारे देश के राष्ट्रपति तथा दो सदनों — राज्यसभा और लोकसभा — को मिलाकर बनती है। हाल ही में हमारे देश का नया संसद भवन बनकर तैयार हुआ है। नए संसद भवन को लेकर आपके मन में कई प्रश्न होंगे, जैसे — आखिर हमें नए संसद भवन की आवश्यकता क्यों पड़ी, इसके निर्माण कार्य में कितनी लागत आई, नए संसद भवन के बनने के बाद पुराने संसद भवन का क्या होगा, नए संसद भवन में क्या खासियत है आदि। यहाँ आप इन्हीं सभी प्रश्नों के विषय में जानेंगे।
पुराने संसद भवन का इतिहास

पहले हम पुराने संसद भवन के बारे में चर्चा करेंगे कि इसका निर्माण कब हुआ था, किसने करवाया था और इसके निर्माण कार्य में कितनी लागत आई थी आदि। हमारे पुराने संसद भवन का निर्माण कार्य 12 फरवरी 1921 में शुरू हुआ था। इसका निर्माण कार्य लगभग 6 वर्षों तक चला। वर्ष 1927 में यह भवन बनकर तैयार हुआ। इसका उद्घाटन 18 जनवरी 1927 को तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड इरविन द्वारा किया गया था। उस समय पुराने संसद भवन के निर्माण में लगभग 83 लाख रुपये की लागत आई थी। संसद भवन लगभग 24,281 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और इसका आकार गोलाकार है।
पुराने संसद भवन का डिज़ाइन और संरचना

इसका निर्माण भारत के चौसठ योगिनी मंदिर की आकृति से प्रेरित होकर किया गया था। इसकी संरचना का डिज़ाइन ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस और सर हरबर्ट बेकर द्वारा 1912-13 में तैयार किया गया था। इसकी आधारशिला प्रिंस आर्थर, ड्यूक ऑफ कनॉट और स्ट्रैथर्न द्वारा रखी गई थी। संसद का प्रमुख राष्ट्रपति होता है। लोकसभा में कुल 545 सदस्य होते हैं, जो आम जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित किए जाते हैं, जबकि राज्यसभा में कुल 245 सदस्य होते हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं।
नए संसद भवन की आवश्यकता क्यों पड़ी?

अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर हमें नए संसद भवन की आवश्यकता क्यों पड़ी। सरकार का कहना है कि पुराने संसद भवन से जुड़े कई चिंताजनक कारणों की वजह से नए संसद भवन की आवश्यकता महसूस हुई। पुराना संसद भवन दोनों सदनों के संयुक्त सत्रों को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया था, जबकि वर्तमान में सांसदों की संख्या बढ़ने की संभावना अधिक है।
पुराने संसद भवन की समस्याएं

एक अन्य कारण पुराने संसद भवन की संरचना है। आधुनिक सुविधाएँ जैसे जल आपूर्ति, सीवर लाइन, एयर कंडीशनिंग, अग्निशमन उपकरण और सीसीटीवी कैमरे जोड़ने के कारण कई स्थानों पर जल रिसाव की समस्या उत्पन्न होने लगी थी, जिससे भवन की सुंदरता प्रभावित हो रही थी। इनमें अग्नि सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता का विषय थी। पुराने संसद भवन का निर्माण उस समय हुआ था जब दिल्ली भूकंपीय क्षेत्र-II में आती थी, लेकिन अब दिल्ली भूकंपीय क्षेत्र-IV में आती है, जो संरचनात्मक सुरक्षा के लिए गंभीर विषय है।
कार्य क्षेत्र की कमी भी एक महत्वपूर्ण कारण था। कुछ आंतरिक गलियारों को कार्यालयों में परिवर्तित कर दिया गया था, जिसके कारण कर्मचारियों के लिए पर्याप्त कार्यक्षेत्र उपलब्ध नहीं हो पा रहा था।
नए संसद भवन की आधारशिला और निर्माण लागत

नए संसद भवन की आधारशिला हमारे प्रधानमंत्री द्वारा कोविड काल में 10 दिसंबर 2020 को रखी गई थी। इसके निर्माण में लगभग 970 करोड़ रुपये की लागत आई है। नया संसद भवन आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण है। इसमें लगभग 1200 सांसदों के बैठने की व्यवस्था की गई है।
नए संसद भवन की खास विशेषताएं
इस बार लोकसभा को हमारे राष्ट्रीय पक्षी मोर से प्रेरित “मयूर थीम” दी गई है, जबकि राज्यसभा को हमारे राष्ट्रीय पुष्प कमल की थीम पर डिज़ाइन किया गया है। नए संसद भवन में कुल 1272 सदस्यों के एक साथ बैठने की व्यवस्था की गई है।
नए संसद भवन में लोकसभा के लिए 888 सांसदों के बैठने की व्यवस्था की गई है, जबकि राज्यसभा में 384 सांसदों के बैठने की सुविधा उपलब्ध है।
नए संसद भवन को अत्याधुनिक तकनीकों से सुसज्जित कर पेपरलेस बनाया गया है। इसमें अल्ट्रा मॉडर्न ऑफिस स्पेस की भी व्यवस्था की गई है। नया संसद भवन त्रिभुजाकार और चार मंजिला है। यह लगभग 64,500 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसकी संरचना कम क्षेत्र के कुशलतम उपयोग को दर्शाती है।
नए संसद भवन को लेकर विवाद
हालाँकि नए संसद भवन को लेकर विवाद भी सामने आए हैं। 19 राष्ट्रीय और क्षेत्रीय विपक्षी दलों ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा स्वयं संसद भवन का उद्घाटन करना न केवल राष्ट्रपति का अपमान है, बल्कि यह लोकतंत्र पर सीधा हमला भी है।