आखिर इन राज्यों को भारत में सात बहनें का दर्जा क्यों मिला ?

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हमारे देश भारत में कुल 28 राज्य हैं और 8 केंद्र शासित प्रदेश। आपको तो पता ही होगा कि हमारे देश के उत्तर-पूर्वी राज्यों में से 7 राज्यों को “सात बहनों” का दर्जा मिला हुआ है। क्या आप जानते हैं कि इन सभी को सात बहनों का दर्जा क्यों मिला हुआ है? अगर आपका जवाब नहीं है, तो आप यहां इसी विषय पर जानकारी प्राप्त करेंगे।

भारत के उत्तर-पूर्व के राज्यों को सात बहनों का दर्जा इसलिए मिला है क्योंकि ये सभी राज्य एक-दूसरे पर निर्भर हैं। ये सभी राज्य मिलकर एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करते हैं, मानो ये एक-दूसरे के पूरक हों।

इन सात बहनों में राज्यों के नाम हैं — असम, नागालैंड, मिजोरम, मेघालय, त्रिपुरा, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश। बहुत से लोगों को लगता है कि सिक्किम राज्य भी इन सात बहनों का हिस्सा है, परंतु ऐसा नहीं है क्योंकि सिक्किम इनका हिस्सा नहीं है। जिस वक्त इन सात बहनों का गठन हुआ था, तब सिक्किम हमारे देश का राज्य नहीं था।

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में इन सात बहनों को मानो प्रकृति का भरपूर आशीर्वाद मिला हुआ है। क्योंकि इन सातों बहनों की सुंदरता इतनी अद्भुत, मनमोहक और आकर्षक है कि देखते ही बनती है।

1. असम — पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार

Kamakhya Temple in Assam, India

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों यानी सात बहनों में सबसे पहले नंबर पर आता है असम। यह दक्षिण-पूर्व में स्थित है, जिसकी राजधानी दिसपुर है। इस राज्य का क्षेत्रफल 78,438 वर्ग किलोमीटर है। पहले इस राज्य को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त नहीं था, परंतु 26 जनवरी 1950 को इसे भारत के राज्य का दर्जा मिला।

असम को पूर्वोत्तर राज्यों का प्रवेश द्वार कहा जाता है, क्योंकि पूर्वोत्तर राज्यों में प्रवेश करने के लिए सबसे पहले असम में प्रवेश करना पड़ता है। इस राज्य में ब्रह्मपुत्र नदी बहती है तथा इसी राज्य में दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली द्वीप स्थित है।

असम राज्य दुनिया भर में अपने मिट्टी से बने मुखौटों के लिए प्रसिद्ध है। असम के डिगबोई शहर में दुनिया की सबसे पुरानी परिचालित तेल रिफाइनरी स्थित है, जो 1901 से लगातार कार्यरत है। राज्य में कुल 33 जिले हैं।

असम राज्य अपने चाय उत्पादन के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। भारत का लगभग 50% चाय उत्पादन केवल असम में ही होता है। एक अनुमान के अनुसार असम में प्रतिवर्ष लगभग 63 से 70 करोड़ किलोग्राम चाय का उत्पादन होता है।

यह राज्य कामाख्या मंदिर, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और अपने विशाल चाय बागानों के लिए बहुत प्रसिद्ध है। पूरी दुनिया में “गोल्डन सिल्क” के नाम से प्रसिद्ध मूंगा रेशम भी इसी राज्य का उत्पाद है।

2. नागालैंड — त्योहारों और जनजातियों की भूमि

नागालैंड का हॉर्नबिल त्योहार और जनजातीय संस्कृति

दूसरे स्थान पर आता है नागालैंड। इस राज्य का गठन 1 दिसंबर 1963 को भारत के 16वें राज्य के रूप में हुआ था। इस राज्य का क्षेत्रफल 16,579 वर्ग किलोमीटर है और इसकी जनसंख्या लगभग 19,80,602 है। राज्य में कुल 12 जिले हैं, जिनमें दीमापुर सबसे बड़ा शहर है।

इस राज्य की लगभग 80% आबादी ईसाई धर्म को मानती है। यहां दुनिया की सबसे तीखी मिर्चों में से एक “भूत जोलोकिया” पाई जाती है। इसे “घोस्ट पेपर” भी कहा जाता है। यह भारत की सबसे तीखी मिर्च मानी जाती है और इसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुका है।

नागालैंड में लगभग 100 से अधिक जनजातियां निवास करती हैं। यहां आज तक कोई भी महिला विधायक नहीं बनी है, इसलिए राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बेहद कम है।

यहां 1 से 10 दिसंबर के बीच हॉर्नबिल त्योहार मनाया जाता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

3. मणिपुर — तैरती झीलों और फूलों की धरती

मणिपुर की लोकटक झील

मणिपुर की राजधानी इंफाल है। इस राज्य को 15 अक्टूबर 1949 को भारत में शामिल किया गया था, परंतु इसे पूर्ण राज्य का दर्जा 21 जनवरी 1972 को मिला।

इस राज्य का क्षेत्रफल 22,347 वर्ग किलोमीटर है और इसकी जनसंख्या लगभग 28,55,994 है। राज्य में कुल 16 जिले हैं। इसकी सीमा उत्तर में नागालैंड, दक्षिण में मिजोरम, पश्चिम में असम और पूर्व में म्यांमार से मिलती है।

मणिपुर को “ऑर्किड बास्केट” भी कहा जाता है क्योंकि यह सिरोई लिली फूल के लिए प्रसिद्ध है। यह फूल पूरी दुनिया में केवल मणिपुर में ही पाया जाता है। राज्य के उखरूल जिले में सिरोई महोत्सव भी मनाया जाता है।

यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों में केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान, विष्णुपुर का विष्णु मंदिर, मोरेह सीमा गांव, उखरूल की पहाड़ियां और कांगला पार्क शामिल हैं।

यह दुनिया का एकमात्र ऐसा राज्य माना जाता है जहां तैरती हुई झील मौजूद है।

4. मेघालय — बादलों का घर

मेघालय का लिविंग रूट ब्रिज और प्राकृतिक सुंदरता

चौथे स्थान पर मेघालय आता है। इस राज्य की राजधानी शिलांग है। इस राज्य को असम के दो बड़े क्षेत्रों — खासी हिल्स और जयंतिया हिल्स — को अलग करके 21 जनवरी 1972 को बनाया गया था।

मेघालय का अर्थ होता है “बादलों का घर” और यह नाम बिल्कुल सही साबित होता है, क्योंकि यहां के चेरापूंजी में सालभर भारी वर्षा होती रहती है। यह भारत का सबसे नम राज्य माना जाता है।

इस राज्य का क्षेत्रफल 22,429 वर्ग किलोमीटर है और इसकी जनसंख्या लगभग 29,64,007 है। यहां कुल 11 जिले हैं।

मेघालय अपने जीवित जड़ पुलों (Living Root Bridges) के लिए बहुत प्रसिद्ध है। यहां की उमनगोट नदी को भारत की सबसे साफ नदी माना जाता है। इसका पानी इतना साफ होता है कि नाव कांच पर तैरती हुई प्रतीत होती है।

यहां भारत का सबसे ऊंचा झरना नोहकालिकाई फॉल्स भी स्थित है। डॉन बॉस्को म्यूजियम, मासमई गुफाएं, गारो पहाड़ियां और एलीफेंट फॉल्स यहां के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं।

अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के कारण मेघालय को “पूर्व का स्कॉटलैंड” भी कहा जाता है।

5. त्रिपुरा — हरियाली और संस्कृति का संगम

त्रिपुरा का उज्जयंता पैलेस

पांचवें स्थान पर आता है त्रिपुरा, जिसकी राजधानी अगरतला है। यह भारत का तीसरा सबसे छोटा राज्य है। इसका क्षेत्रफल 10,491 वर्ग किलोमीटर है और इसका गठन 21 जनवरी 1972 को किया गया था।

त्रिपुरा में कुल 8 जिले हैं। इस राज्य की जनसंख्या लगभग 36,73,917 है। यह राज्य आधे से अधिक भाग में जंगलों से घिरा हुआ है।

त्रिपुरा म्यांमार और बांग्लादेश की नदी घाटियों के बीच स्थित है। इसके पश्चिम, उत्तर और दक्षिण में बांग्लादेश तथा पूर्व में असम और मिजोरम स्थित हैं।

पूर्वोत्तर भारत में गुवाहाटी के बाद अगरतला सबसे प्रसिद्ध शहरों में गिना जाता है।

6. अरुणाचल प्रदेश — उगते सूर्य की भूमि

अरुणाचल प्रदेश का तवांग मठ

छठे स्थान पर अरुणाचल प्रदेश आता है। यह भारत का 24वां राज्य है और सात बहनों में सबसे बड़ा राज्य भी है।

इस राज्य में कुल 25 जिले हैं। इसका क्षेत्रफल 83,743 वर्ग किलोमीटर है और जनसंख्या लगभग 13,82,611 है। क्षेत्रफल के अनुसार यह भारत का 15वां सबसे बड़ा राज्य है।

अरुणाचल प्रदेश को “उगते सूर्य की भूमि” कहा जाता है क्योंकि भारत में सबसे पहले सूर्य की किरणें यहीं पड़ती हैं। यहां सुबह लगभग 4:30 बजे सूर्योदय हो जाता है।

आजादी के लंबे समय तक यह भारत का पूर्ण राज्य नहीं था। पहले इसे नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (NEFA) कहा जाता था। 1972 में इसका नाम अरुणाचल प्रदेश रखा गया।

इसकी सीमाएं म्यांमार, भूटान और चीन से मिलती हैं, जिसके कारण यहां की संस्कृति काफी मिश्रित दिखाई देती है। इसे “पूर्वोत्तर भारत का आभूषण” भी कहा जाता है।

सर्दियों में यहां का अधिकांश भाग बर्फ से ढक जाता है, इसलिए इसे “भारत का फिनलैंड” भी कहा जाता है। राज्य का लगभग 80% हिस्सा जंगलों से भरा हुआ है।

यहां का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल तवांग बौद्ध मठ है, जो लगभग 400 साल पुराना और भारत का दूसरा सबसे बड़ा बौद्ध मठ माना जाता है।

7. मिजोरम — नीले पर्वतों की धरती

मिजोरम के नीले पर्वत और प्राकृतिक दृश्य

सातवें स्थान पर मिजोरम आता है। यह राज्य 1972 तक असम का हिस्सा था, परंतु 20 फरवरी 1987 को इसे भारत का 23वां राज्य घोषित किया गया। इसकी राजधानी आइजोल है।

इस राज्य का क्षेत्रफल 21,081 वर्ग किलोमीटर है और जनसंख्या लगभग 10,91,014 है। यहां कुल 11 जिले हैं।

विश्व की कर्क रेखा इस राज्य के मध्य से होकर गुजरती है। मिजोरम भारत का तीसरा सबसे अधिक साक्षर राज्य माना जाता है।

यह राज्य घने जंगलों से भरा हुआ है, जिसके कारण यहां मार्च से सितंबर तक लगातार वर्षा होती रहती है। यहां की सबसे बड़ी नदी चिमतुईपुई है, जिसे कालादान नदी भी कहा जाता है। राज्य की सबसे बड़ी झील पलक झील है।

“मिजोरम” शब्द “मिजो” शब्द से निकला है। यहां लगभग हर 12 साल बाद बांस में फूल खिलते हैं। इन फूलों को खाने के बाद चूहों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है, जिसके कारण वे खेतों और घरों में रखा अनाज नष्ट कर देते हैं। इससे अकाल जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।

यह राज्य अपने नीले पर्वतों के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है।

पूर्वोत्तर भारत और सुरक्षा चुनौतियां

हमारा पूर्वोत्तर भारत अपनी खूबसूरती और विशेषताओं के साथ-साथ सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इन राज्यों की सीमाएं कई अन्य देशों से मिलती हैं। अधिकांश क्षेत्र घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में स्थित हैं, जिसके कारण यहां उग्रवादी गतिविधियों और घुसपैठ की समस्याएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं।

इसके अलावा, चीन अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर दावा करता रहा है। यह क्षेत्र मैकमोहन रेखा के दक्षिण में स्थित हैं। ऐसे मुद्दे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण चिंता का विषय बने हुए हैं।

Chandni Pricha
Chandni Prichahttp://prichax.com
मैं चांदनी प्रिचा हूं और मुझे हिंदी में रोचक, ज्ञानवर्धक और रहस्यमयी विषयों पर लिखना पसंद है। मैं इतिहास, रहस्य, रोमांच, अद्भुत घटनाएं और दुनिया से जुड़े अनोखे तथ्यों पर लेख लिखती हूं, ताकि पाठकों को नई और दिलचस्प जानकारी सरल भाषा में मिल सके। मेरा उद्देश्य ऐसे कंटेंट तैयार करना है, जो पाठकों को पढ़ने के साथ-साथ कुछ नया सीखने का अनुभव भी दे।

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